Monday, July 30, 2012



ये टूटकर  बिखरा फानूस नहीं,
ये तो ख्वाब हैं उस दीवानी के,
जिनको हुकूमत ने पायों तले  रौंदा.

उसका जनाज़ा उठा तो गुमनामी में,
उसकी मय्यत पे न आंसू बहे थे,
उसकी ख़ता थी तो ये कि ,

एक  गरीब को, चाँद से मुहब्बत थी,
एक कनीज़ ने, एक शहजादे  की
चाहत की थी

# मुग़ल -ए - आज़म 
http://themarvelouslife.files.wordpress.com/2010/04/my_dying_rose.jpg

हज़ार हसरतें हैं गुमनाम सी,
रोज़ हलक में दम तोड़ने वाली.
उनकी कब्रों पर, यार हम
सजदे पेश करें तो कैसे।

Friday, July 27, 2012

आहटें




ये आहटें कुछ कहती हैं 
पर न जाने क्यूँ सुनना 
चाहती ही नहीं मैं 
क्या संदेसा देना है 
उनको, नहीं समझती मैं 

चली आती हैं वो फिर 
भी, जैसे गाने में बजता 
मद्धम सा संगीत हो,
जैसे मन के पटल पर 
रंगों की हलकी सी छींट हो,
पर उसे मिटा नहीं सकती मैं.

जुगनुओं सी इनकी भाषा है ,
आते- जाते, पल भर को,
अंधेरों में, जलती-बुझती ,
इशारे तो कुछ करती हैं,
इनकी पहेलियाँ मगर, 
सुलझाने को ठहरती नहीं मैं.

Sunday, June 10, 2012

तन्हाई और भीड़




भीड़ के संग  चलती हूँ,
साथी तो हर तरफ हैं,
पर फिर भी रहती  अकेली
सी हूँ ,साथ निभाती है बस
यह मेरी तन्हाई, अब तो
लगने लगा है कि तन्हाई ही
है  मेरी  सच्ची सहेली।


Saturday, June 9, 2012

ख्वाहिशें




ख्वाहिशें हैं ऐसी कि ,
चाँद हथेली पर सजा लूँ,
बहती हवा की चुनर बना
लिपट जाऊं  उसी में,
सिमट जाऊं उसी में।

फूलों से रंग चुरा के
अपने घरौंदे पे बिखेर दूँ ,
परियों जैसे पंख लगा के,
सैर करूँ मैं गगन की।

ख्वाहिशें हैं ऐसी कि,
उदास चेहरों को मुस्कानों की
सौगातें बाटूँ , सूनी सूनी
आखों में तारों से मांगकर,
चमक के खजाने भर दूँ। 

डूबती हुयी कश्तियों को
साहिलों के आगोश दूँ,
पोटली भर जादू मिले मुझे,
 तो दुनिया हसीँ बना दूँ

Saturday, May 26, 2012




 लगे यूँ जैसे कि उड़ सकती हूँ
जैसे ये महकी सी हवा पंख  
बनके जुड़ सी गयी है मुझमें कहीं 
अब तो क़दमों को थामकर, गगन 
की सैर पे जाना है, कि बहुत चल 
लिए अब, आसमान  अगला ठिकाना है .